जिसे मानता है मदन,अपना सबसे खास।
उसे बुलाकर देख ले, दुःख में अपने पास।।
सीता,अनुसुइया,सती, इनकी करे बखान।
घर जब जन्मे बेटियां, लेते इनकी जान।।
प्रेम जगत में कीजिये, जैसे करे चकोर।
स्वाति बूँद की चाह में, नमित रहे करजोर।।
जिसको चलना है मदन, पर उपकार की राह।
सदा बृक्ष से सीखिये, अनुपम मिले सलाह।।
कचरे में पायी गयी, बेटी जीवन शेष।
सोचो कितना गिर गया, मेरा भारत देश।।
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