– गीत –
फूल खिले लागल, सुख मिले लागल,
अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल
कहीं कलि पर अलि बिहार करता,
कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल …(टेक)
धरती पीयर हो गइली दुल्हनिया नियर,
ओस चमकेली चनिया के पनिया नीयर,
बगिया में नबाब बनि गइले गुलाब,
इ बुझाता धरती पर आकाश आ गइल …(टेक)
नाया किसलय निकसले झरल पात जब,
रट पपीहा लगवलसि बनत बात तब,
रोज मलय पवन मन के पागल करे,
घास पातो पर नाया सुबास आ गइल …(टेक)
मन ना रोकले रोकाला रसदार भइले,
रतिपति चारू ओर पहरेदार भइले,
मस्त भइले ‘अनारी’ छठा देखि के,
जे फलेवों रहल अनुका पास आ गइल …(टेक)
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