– गजल –
बचा के आँख हकीकत छुपा नहीं सकती
ये जुस्तजू भी अजब है बता नहीं सकती
लगाओ और लगामें हमारी उल्फत पर
महक जो गुल में है आँधी उड़ा नहीं सकती
रहे खोलूस में जलवागरी से क्या लेना
गुलों को खार की शफकत भुला नहीं सकती
सितम ज़रीफ भी बोलेंगे आईना लेकर
किसी की रस्मे वफा ताब ला नहीं सकती
सुना दो शौक मेरा जाके अह्ले हैराँ से
सितम की राह किसी दिल को भा नहीं सकती
लहू के रंग की शोखी बना के दीवाना
बहार कुछ भी करे फ़ैज़ उगा नहीं सकती
अदावतें भी सहे रोज़ सुरखोरु हो कर
नज़र को ऐसी मुहब्बत झुका नहीं सकती
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