(1) गर्भ में मुझको मत मारो आने दो माँ
शौर्य दुनिया में मुझको दिखाने दो माँ
तोड़कर डाल से मुझको फेंको न तुम
मैं हूँ कोमल कली मुस्कुराने दो माँ

(2) नींद से जागी हूँ मैं ख्वाब नहीं हूँ
मैं खुद से रौशन हूँ माहताब नहीं हूँ
हर कोई मुसफिर भला क्यों मुझे पढ़े
मैं जिन्दगी हूँ कोई किताब नहीं हूँ

(3) वतन की मैं दीवानी हूँ वतन को याद करती हूँ
लुटे गुलशन न ये अपना यही फरियाद करती हूँ
शहीदों ने जिसे सींचा है दे देकर लहू अपना
चमन है ये वही प्यारा जिसे आबाद करती हूँ

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