– बासन्ती गीत –
महमहा रहा है भू गगन, लग रहा बसन्त आ गया
हो रहा अधीर मन मगन, लग रहा बसन्त आ गया
लग रहा बसन्त आ गया —–
बादलों के अंचल में, छुप रही सुमीत चाँदनी
हर तरफ दिशाओं में, गूँजने लगी है रागिनी
चल रही झकोरती पवन, लग रहा बसन्त आ गया
लग रहा बसन्त आ गया —–
सप्तरंगी पुष्पों से, फूलों के बगान सज रहे
गूँज से विहंगों के, मधुमयी बिहान सज रहे
खुशबुओं से भर गया गगन, लग रहा बसन्त आ गया
लग रहा बसन्त आ गया —–
पीली पीली सरसों के, फूलों जैसी लेके ओढ़नी
मन चुराने आई है, मुँह छुपाके कौन चोरनी
दे रही है मद भरी छुअन, लग रहा बसन्त आ गया
लग रहा बसन्त आ गया —–
कौन है बड़ा छोटा, भेद भाव मिटने लगे
झोंपड़ी की किस्मत के, अन्धकार छँटने लगे
मधुर मधुर वर्ष को नमन, लग रहा बसन्त आ गया
लग रहा बसन्त आ गया —–
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