– अखलास के गुलाब –

राहे वफ़ा में शम्मा जलाते रहेंगे हम
नफ़रत की तीरगी को मिटाते रहेंगे हम

दीवार जुमल्मो-जौर की ढाते रहेंगे हम
अम्नो-अमाँ का ताज बनाते रहेंगे हम

बातिल हमारी राह में हाएल हुआ करे
सर अपना राहे हक़ में कटाते रहेंगे हम

झोंके हज़ार जुल्मो-सितम के चला करें
अखलास के गुलाब खिलाते रहेंगे हम

दीवार ज़ुल्मतों की खड़ी है तो क्या हुआ
अनवर क़दम को आगे बढ़ाते रहेंगे हम

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