– ग़ज़ल –
हम जबसे मजबूर हो गये
अपने हमसे दूर हो गये
झूठी दौलत ताकत शोहरत
मद में सबके चूर हो गये
सज्जन तो गुमनाम रह गये
दुर्जन अब मशहूर हो गये
कत्ल फरेब झूठ मक्कारी
ये तो अब दस्तूर हो गये
धन कुबेर और बाहुबली जो
शातिर थे मशहूर हो गये
हमने उनको राह दिखाया
पद पाया मग़रूर हो गये
एक आपके आने से ही
सबके चेहरे पुरनूर हो गये
–––