– ग़ज़ल 

हो जाएं जो सरगरमे अमल अहले ज़मीं और
दुनिया यही हो जाएगी फिर कितनी हसीं और

ऐ दिल तेरे हाथों हुआ बरबाद बहुत कुछ
अब अपनी तबाही मुझे मन्ज़ूर नहीं और

कह सुन के ज़रा आप ही अब उनको मनाएं
दीवाने यहाँ से न चले जाएं कहीं और

संगे दरे जानां भी यहीं खिंच के चला आए
बढ़ जाए जो थोड़ा सा मेरा ज़ौक़े यक़ीं और

एक रोज़ मेरे ख़ानए दिल में भी मकीं हो
दिल में तेरी उल्फ़त के सिवा कुछ भी नहीं और

सइयाद का बस जब नहीं चलता किसी सूरत
फिर दाम बिछाता है वो हमरंगे ज़मीं और

कहते हुए डरता हूँ ग़मे दिल का फ़साना
सुनते हैं कहीं आप न हों चीं बजबीं और

परदे से निकल कर कभी जलवा तो दिखा दे
कुछ इसके सिवा आरज़ू जौहर को नहीं और

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