by Nazar | Jan 22, 2025 | Mohit Negi Muntazir
————– ग़ज़ल ————– जब मुस्कुराने को हुए लब मेरे बेकरार पहरे लगे हैं उनपे ज़माने के बेशुमार देखे हैं यूँ तो हमने हसीं ख्वाब बार बार ताबीर देख कर मगर आँखें हैं अश्कबार दुश्मन भी अपना गर हुआ नादिम ख़ताओं पर सीने से अपने उसको लगाया है हमने यार दामन में सबको प्यार से रक्खा समेट कर राहों में मेरे फूल मिले या मिले हों खार मैंने दिया जला के लहू से जो रख दिया तूफाँ उसे बुझाने को आया है बार बार बादे बहार एक नज़र उस तरफ भी हो जिस गुलशने ख़ेजाँ में न आई कभी बहार...
by Nazar | Jan 19, 2025 | Mohit Negi Muntazir, SHAYER
–– ग़ज़ल –– जिनके ज़ुल्मों को हम सह गए वो हमें बेवफ़ा कह गए ख़्वाब वो मिलके देखे हुए आँसुओं में सभी बह गए तुम न आये नज़र दूर तक राह हम देखते रह गए रो पड़ा गाँव में जा के मैं मेरे पुश्तैनी घर ढह गए जिंदगी के हर इक मोड़ पर ज़ख़्म जलते हुए रह गए ‘मुंतज़िर’ ढाल कर शेर में अपनी बातों को क्यों कह गए ––– ©मोहित नेगी...
by Nazar | Jan 19, 2025 | Mohit Negi Muntazir, SHAYER
–– ग़ज़ल –– साथ में जी लूँ या जीते जी मर जाऊँ अपना सब कुछ तुझको अर्पण कर जाऊँ तेरी ख़ातिर छोड़ दिया घर बार अपना बोल मैं क्या मुँह लेकर अपने घर जाऊँ दुनिया की सारी दौलत इक ओर करूँ तेरा साथ अगर पाऊँ तो तर जाऊँ दिल का कोना खाली खाली लगता है मिल जाये जो साथ तिरा तो भर जाऊँ मेरा बस इक ख़्वाब है ‘मोहित’ जीवन में कुछ नेकी के काम जहाँ में कर जाऊँ...
by Nazar | Jan 19, 2025 | Mohit Negi Muntazir, SHAYER
–– ग़ज़ल –– जब हमें तुम याद आये रात भर आंसुओं ने ग़म बहाये रात भर ख़्वाब कितने ही सजाये रात भर जिनको चाहा वो न आये रात भर एक सूरज ढल गया जब शाम को चांद तारे मुस्कुराये रात भर कल मुझे इक फूल पन्नों में मिला दिन पुराने याद आये रात भर जिनके प्रियतम दूर थे परदेस में चांदनी ने दिल जलाये रात भर कहते हैं जो किस्मतों का खेल है ख़्वाब उनको क्यों जगाये रात भर...
by Nazar | Jan 19, 2025 | Mohit Negi Muntazir, SHAYER
परिचय – मोहित नेगी मुंतज़िर का जन्म 12 नवम्बर 1995 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले के सौंराखाल गांव में हुआ। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सौंराखाल तथा टिहरी गढ़वाल से प्राप्त की। इसके पश्चात उच्च शिक्षा के लिए श्रीनगर गढ़वाल आ गये तथा वहां राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज श्रीनगर (गढ़वाल )से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। तत्पश्चात दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया । वर्तमान में हिंदी साहित्य (परास्नातक ) व इतिहास (परास्नातक ) में अध्ययनरत हैं। कॉलेज के दिनों में इन्हें कविता तथा अभिनय का शौक़ लगा। जिसके कारण विभिन्न नाटकों तथा रामलीला में अभिनय करने लगे, धीरे-धीरे गढ़वाली फिल्मों में हाथ आज़माया तथा इतनी कम उम्र में ही तक़रीबन 4 गढ़वाली फिल्मों तथा अनेकों एल्बमों में अभिनय किया। “सूबेदार साब का नौना” इनकी प्रसिद्ध फिल्म है। रंगमंच के साथ लेखन भी अनवरत चलता रहा, हिन्दी तथा गढ़वाली दोनों भाषाओं के कवि सम्मेलनों में कॉलेज के दिनों से ही शिरकत करने लगे थे। इन्होंने महज़ 20 साल की उम्र में स्वयं को गढ़वाली के प्रतिष्ठित कवि के रूप में स्थापित कर लिया। तद्पश्चात हिन्दी तथा उर्दू की विभिन्न विधाओं पर हाथ आज़माना शुरू किया और बहुत ही कम समय में ग़ज़ल, नज़्म, कविता, दोहे, कुंडलिया तथा घनाक्षरी आदि विधाओं में लिखने लगे। इनकी रचनायें प्रसिद्ध हिंदी वेबसाइट “कविताकोश” व प्रसिद्ध उर्दू वेबसाइट ” रेख़्ता” पर भी प्रकाशित हैं। इनकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अक्षरम, किसलय इनके दो साझा कविता संग्रह हैं। इनको विभिन्न साहित्यिक संस्थानों ने सम्मानित भी किया है, जिनमें पर्पल पेन साहित्यिक समूह द्वारा प्रदत्त ‘साहित्य केतु सम्मान’ प्रमुख है। इनको विभिन्न वाद्ययंत्र जैसे बांसुरी,हारमोनियम, ढोलक, तबला तथा पियानो का भी विशेष ज्ञान है।...