by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हे विरणावादिनी मईया मेरी झोली ज्ञान से भर दे। सत्य सदा लिखे कलम मेरी मुझको ऐसा वर दे। छल दंभ पाखंड झूठ से हमको दूर करो तुम। मन में भर दो अविरल ज्योति तम को दूर करो तुम। हे शारदे मुझ पे बस तू ये उपकार कर दे। मेरी झोली ज्ञान से भर दे। न भेद जाति धर्म का हो न ऊँचा कोई नीचा। सब ही तेरे बच्चे हम हैं कर्म हमारी पूजा। मजधार में फंसी है नैया भव से पार कर दे। मेरी झोली ज्ञान से भर...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हे माता मेरी शारदे तू भव से उतार दे। बुद्धि को विस्तार दे ज्ञान का भंडार दे। हे माता मेरी शारदे। दूर सब अँधेरे हो ज्ञान के सवेरे हो। सुबुद्धि दे ज्ञान दे सपनों को उड़ान दे। हे माता मेरी शारदे। मिटे जुलम की दास्ताँ न कोई पाप हो यहाँ। हर तरफ प्यार हो न कोई तकरार हो। हे माता मेरी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हम होंगे सब में पास हम होंगे सबमें पास हम होंगे सब में पास एक दिन………..। हो………………। सोते हैं बिंदास लिखते हैं बक़वास फिर भी है विश्वास मार्क्स मिलेंगे झक्कास एक दिन……….। हो……………..। सबके अलग अलग एजेंडे आज़माते नए नए हथकंडे जब पेपर में आते अंडे चलते टीचर जी के डंडे फिर भी रखते पूरे आस हम होंगे सबमे पास एक दिन………….। व्हाट्सएप पर होता है सवेरा फेसबुक पर रहता है डेरा पुस्तक न आती हमें रास करते खुदा से है अरदास न हमें इस झंझट में फाँस हम होंगे सबमे पास एक...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
खिड़की को देखूँ कभी, कभी घड़ी की ओर, नींद हमें आती नही, कब होगी अब भोर। कब होगी अब भोर, खेलने हमको जाना, मारें चौक्के छक्के, हवा में गेंद उड़ाना। कह ‘अम्बर’ कविराय, पड़ोसन हम पर भड़की जोर जोर चिल्लाये, देखकर टूटी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हमारे मास्टर श्यामलाल, करा रहे थे गणित के सवाल। मास्टर जी ने दो सवाल कराये और ऐंठ गए। वापस आ कुर्सी पर बैठ गए। उन्हीं के पास में बैठे थे मास्टर सिंधी, बच्चों को पढ़ाते थे हिंदी। ब्लैक बोर्ड को देखते होल-होले, फिर श्यामलाल से बोले। आपने पाँच मिनट में सब पढ़ा दिया ये देख में चोंकता हूँ, में तो पूरे पीरियड में एक पाठ नही पढ़ा पाता जबकि कुत्तों की तरह भौंकता...