by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
एक दिन मिसेज डोली, अपने पति से बोली, अजी! सुनिए, आज आप बाजार, चले जाइये, और मेरे लिए, एक क्रीम ले आइये, सुना है आजकल, टाइम में थोड़े, क्रीम लगाने से, काले भी हो जाते है गौरे, ये सुनकर पति ने मुँह खोला, और हँसते हुए बोला, अरे ! पगली, तू भी कितनी है भोरी, क्या क्रीम लगाने से, कभी भैंस भी हुई है गोरी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
अभिषेक कुमार अम्बर उपनाम – अम्बर जन्म तिथि- 07 मार्च 2000 जन्मस्थान – मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश राष्ट्रियता – भारतीय विद्या – हास्य व्यंग्य , ग़ज़ल , गीत , छंद आदि| अभिषेक कुमार अम्बर हिंदी साहित्य की एक उभरती हुई प्रतिभा हैं। इनका जन्म मेरठ के मवाना क़स्बा में 07 मार्च 2000 को हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की। आप वर्ष 2014 से निरंतर हिंदी और उर्दू साहित्य की सेवा में समर्पित हैं। आप हास्य व्यंग्य कविता, गीत, ग़ज़ल, छंद आदि विद्या में लिखते हैं। मुख्यतः श्रृंगार रस के कवि हैं तथा देश के सुप्रसिद्ध कवि एवं कवियत्रियों के साथ काव्यपाठ कर चुके हैं जिनमें पद्मभूषण गोपालदास नीरज, पद्मश्री बेकल उत्साही, लक्ष्मी शंकर बाजपाई, ममता किरण, दीक्षित दनकौरी आदि मुख्य हैं। आप साहित्यिक मंचों पर सक्रिय भूमिका में...
by Nazar | May 22, 2016 | Homepage
———– ग़ज़ल ———— अगर तारीक मुस्तकबिल है तुम से क्या मतलब चमन वीरां सही मेरा बहारो तुम से क्या मतलब मेरी रूदादे ग़म रस्मन न पूछो दोस्तो मेरे बताऊँ क्या तुम्हें झूठे सहारो तुम से क्या मतलब अगर तामीर शाखे गुल पे मेरा आशियाना है तो ऐ बरके तअस्सुब के शरारो तुम से क्या मतलब करूँगा मैं ग़ज़ल ख्वानी तुम्हारी खुश अदाई पर लिये तुम आइना जुल्फें संवारो तुम से क्या मतलब हक़ाएक़ जब कभी अखबार की जीनत नहीं बनते चमन जलने दो ऐ नामा निगारो तुम से क्या मतलब पिलाता है अगर अतहर को साक़ी जाम नज़रों से तो रिन्दो, मयकशो, बादा गुसारो तुम से क्या मतलब – अतहर अब्दुल्लाह सौदागर सुकरावल, टांडा, अम्बेडकर नगर...
by Nazar | Nov 30, 2015 | Pt. Ramnawal Mishra
नाम– पं० रामनवल मिश्र पिता– स्व० रामचन्द्र मिश्र माता– स्व० कवलपति देवी जन्म– 02-01-1922 बड़का भइया– स्व० रामअवध मिश्र छोटका भाई– डॉ० रामदरश मिश्र पढ़ाई – हिन्दी, उर्दू मिडिल पता– डुमरी मिश्र, पो० बिशुनपुरा वाया बरही, जनपद गोरखपुर (उ०प्र०) सेवा– ग्राम सुधार में छः महीना आर्गनाइजर (सन 1943 में), 1943 से 1949 तक गाँधी आश्रम में, 1949 से 1982 तक ग्राम पंचायत अधिकारी। विशेष– आकाशवाणी गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, लखनउू, आगरा, सम्भलपुर, बम्बई और दूरदर्शन गोरखपुर, मउू, वाराणसी से कविता तथा गीत का प्रसारण। गोष्ठी व कवि सम्मेलन में कविता पाठ। सम्मान– विद्या निवास मिश्र न्यास वाराणसी द्वारा लोक कवि सम्मान।...
by Nazar | Nov 25, 2015 | Pt. Ramnawal Mishra
टका सेर भाजी ह टका सेर खाजा नगरी अन्हेर हउवे धमधूसर राजा अइसन ना अवसर पइ ब भरि ल अंजुरी खा कउवा मामा गदा गइल जोन्हरी खा कउवा मामा ………. मासू क मोटरी ह गीध रखवार बा चामे क बेरहा कूकुर रखवार बा नाथ नाहींं पगहा खाला खेत गदहा बकुलन के सउँपल बा ताले क मछरी खा कउवा मामा ………. अन्हरा बांटे सिरनी मिलि जुलि खात बा मुसवा मोटाइल लोढ़ा भइल जात बा टूटि गइले सिकहर बिलारी के भागी घिउवे में पाँचो बुड़ल हउवे अंगुरी खा कउवा मामा ………. रहरी क टाटी ह गुजराती ताला सुअरी के ह सेनुर गिरगिटे क माला तेलवा चमेली क माथे छछुनरी के गलवा पे पउडर घसति बाटी बनरी खा कउवा मामा ………. उपदेसवा देत ह अहिन्सा क चीता मुड़ि कटवे बाँचे रमायन आ गीता दे ख कुलबोरनी बनेले पुरुवन्ता सीता कहाली जनमवे क ओढ़री खा कउवा मामा ………....