जीवन वृत्त

नामः– नीलकमल गुप्त विक्षिप्त पिता का नामः– श्री जन्म– 1954 जन्म स्थानः– धर्मशाला बाजार, गोरखपुर (उ०प्र०) शिक्षाः– एम०ए०, एल०एल०बी०, कविताचार्य लालसा– कविता पाठ के अतिरिक्त अध्यात्म की ओर अग्रसर, मानवता के कल्याण के लिये सतत परिश्रम एवं प्रत्येक माह की पूर्णिमा को काव्य गोष्ठी का आयोजन।...

जग मग ज्योति जलीं ़़़

जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं देखीं धरा पर अप्सराएं, बन ईर्ष्यालु जलीं धरा पर जब जब ज्योति जलीं ….. पथ पथ मग मग गलियां गलियां, द्वारे द्वारे द्युति आवलियां टिमटिमाती टोलियां उनकी जैसे अग्नि पुष्प की कलियां प्रस्फुट प्रदीप्त बल्लरियों में भातीं भाँति भलीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (1) नहीं सह सकीं धरती का यश द्रोहोद्वेग द्वेषेर्ष्यावश युद्ध योजना भईं सुनिश्चित बनीं सहायक तमा अमावस धरा विरुद्ध अप्सरास्पर्धा चाल कुचाल चलीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (2) तिमिर तमा पति पत्नी दम्पति रही अमा जो उनकी सन्तति तामस वृत्ति तमो गुण प्रेरित असुर वैचारिक मानसिक मति क्षण क्षण में रण पण पण में रण खल की खली खलीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (3) दुष्टों का रण युद्ध अकारण उग्र स्वरूप किया जो धारण तमा अमा चन्द्रमा हरण कीं एकमात्र ईर्ष्या ही कारण तिमिर–तमातमसासुर सेना बढ़ीं चढ़ीं मचलीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (4) विनाश तत्व का बढ़ा महत्व धर्म सत्व का क्षीण अर्हत्व भईं ऋद्धि–सिद्धि क्रुद्ध विरुद्ध उमा रमा का मरा मर्मत्व शुद्धि बुद्धि विद्‍या सुपात्रता अवगुण रूप धरीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (5) बढ़े उपद्रव में द्रव ही द्रव, द्रव मायावश किया उपद्रव धरा विरोधी बढ़े धरा पर अधर्मवश लक्ष्‍मी दर्पद्रव जनमानस की अनाचारिता सच्चर्या निगलीं जग मग ज्योति जलीं, धरा पर जग मग ज्योति जलीं … (6) विस्फोटक विध्वंशक अधर्म लक्ष्‍मी विवश उद्दाहक कर्म दर्पद्रव दर्शन दर्पावलि किया दीपावलि का अपशर्म उलूकारूढ़ माया विमूढ़ बनकर छलीं छलीं जग मग...

जीवन वृत्त

नाम– मुकेश कुमार साहित्यिक नाम– मुकेश मधुर जन्म– 19 अगस्त 1988 पिता– श्री जगत नारायण प्रजापति माता– श्रीमती देवराजी शिक्षा– बाँसुरी वादन, शास्त्रीय संगीत अभिरुचि–द साहित्य, संगीत, चित्रकला पुरस्कार एवं सम्मान– राष्ट्रीय कला मेला प्रतियोगिता में भारत की प्रथम महिला डीन चित्रकत्री डा० चित्रलेखा सिंह जी ने दो स्मृति चिन्ह, दो गोल्ड मेडल, चार प्रशस्ति पत्र देकर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। (दिनांक 21-02-2014) स्थाई पता– ग्राम–कटोखर, पोस्ट–हँसवर, जिला–अम्बेडकर नगर, पिनकोड–224143 मोबाइल नं०– 8853968002, 8115670276 –––...

जीवन वृत्त

नामः– माधुरी सिंह मधु पिता का नामः– श्री लल्लन प्रसाद सिंह माता का नामः– श्रीमती तारा देवी जन्म स्थानः– खड्डा, जिला कुशीनगर (उ०प्र०) शिक्षाः– एम०ए० मोबाइल सं०ः– 9695779092, 8543930417...

क़ता ़़़

(1) तूफान में कश्ती को संभाला नहीं जाता मुझ तक किसी दिये का उजाला नहीं जाता जीने की भला कैसे उम्मीद छोड़ दूँ नाकामियों को मौत से टाला नहीं जाता (2) ये नन्हें पाँव हैं मेरे मुझे चलना नहीं आता बहुत मासूम भोली हूँ मुझे छलना नहीं आता न जाने लोग कैसे घर किसी का फूँक देते हैं दिया दहलीज की हूँ आग सा जलना नहीं आता (3) उम्र भर प्यार के गीत गाते रहो दर्द में भी सदा मुस्कुराते रहो मंजिलें चूम लेंगी तुम्हारे क़दम राह काँटों में अपनी बनाते रहो...