परिचय

नाम –            श्याम लाल शर्मा उपनाम –       अल्हड़ बीकानेरी जन्म –          17 मई 1937, ग्राम–बीकानेर, जिला–रेवाड़ी, हरियाणा । प्रथ्रम काव्य संग्रह –    भज प्यारे तू सीताराम सम्मान –                   ठिठोली पुरस्कार, काका हाथरसी सम्मान एवं हास्य रत्न । मृत्यु –            16 जून 2009...

रन्जो आलाम से ़़़

                      ग़ज़ल रन्जो आलाम से घबरा के जो डर जाते हैं सच में ऐ दोस्त इसी गम में वो मर जाते हैं दिन में बुनते हैं खयालात का ताना बाना रात में दर्द की मानिन्द बिखर जाते हैं कितने खुदगर्ज हैं वो लोग जो लालच दे कर वक्त पडृने पे यहाँ हंस के मुकर जाते हैं दिन के औकात जो दफतर के लिये लिक्खे हैं खुशनुमा शाम जो आ जाये तो घर जाते हैं अब चले आओ कि रंगीन हैं शामें अपनी साथ होते हो तो गम सारे निखर जाते हैं रोज करते हैं जो एलान वो फरदन फरदन बात जब आए सवालों की सुधर जाते हैं फब्तियां कसते हैं एहसास जो मेरे ऊपर शेरगोई पे मेरे झुक के गुजर जाते हैं...

इहवाँ मोरि आँखि ओनाये ़़़

– गीत – इहवाँ मोरि आँखि ओनाये न पावै मथवा पर रोरी लगाये तो हैं सिमवां पर लाल पठावत बानी लजिया देसवा के बचइबा तुहीं तोंहसे इहै आस लगावत बानी   —–(1) करगिल फतह कइ के अइबा इहवो बिधना से मनावत बानी अब देस अ देस के आन बदे जिनगी तोर दाँव चढ़ावत बानी   —–(2) सन पैंसठ से सरहद पे लला मोरे मांगी के लाली हेराइल बानी बिन्दिया छटकल मथवा के ओहीं अबले ऊ न आगि बुताइल बानी   —–(3) लजिया दुधवा के मोरे बचवा अब तो तोरे कान्हे पे आइल बानी सरिया फेरु आज दुसासन के हथवा से हे लाल खिंचाइल बानी   —–(4) मोरे राखी के लाजि सुना बिरना संघरी देसवा के जोराइल बानी मन में जवना किछु साधि रहल एही देस पे ऊहो ओनाइल बानी   —–(5) घुसपइठि भइल एतनै सुनि के सच दादी बहुत खरुआइल बानी कबले बदला ललवा के चुकी ऊ त एही बदे अकुलाइल बानी   —–(6) हमरो ई हुमासि हवै पियवा लजिया सेनुरा के लजाये न पावै गोली लगै छतिया पे भलै पिठिया पर एगो छुआए न पावै   —–(7) गंउंवां भर के बिसवास जवन पियवा तनिको ऊ ओराये न पावै होइ जइहा सहीद भले उहंवां इहवां मोरि आँखि ओनाये न पावै   —–(8) तूं त लाजि हवा देसवा के पिया सरहद के हवा तोंहईं रखवारा चमकै ला तुहीं मंगिया में मोरी धरती क हवा तूं त चान सितारा   —–(9) मोरी अइया के आँखी के जोति हवा बिनु तोरे बुझ ाला ओन्हैं अन्हिंयारा हमराज़ चेतावैं तबो तोंहके करगील हवै तोहहूँ से पियारा   —–(10)...

सीता सावित्री हमही ़़़

– गीत – सीता, सावित्री हमही बनबी मीराबाई जनि मुववाव माई खाके दवाई ………. (टेक) करबू कुकरम लागी भारी हतियारी, देबे लगिहे गारी पाता लागते ‘अनारी’ जहर होई जिनगी चलबू मुंह चोरवाई ………. (टेक) छोडि़ देबू जियत त बाजी कहियो बाजा, आई बरिआति संगे रही हे दुलहा राजा, गारी गवाई दुअरा बाजी शहनाई ………. (टेक) पीतर नेवतबू तु मानर पूजि के लावा मेरइहे भइया देबू जवन भुजि के, दीहे कनिया दान पापा जाॅघ पर बइठाई ………. (टेक) बेटी हम बन तानी, हमरो अफसोस बा, लेता दहेज त समाज के न दोष बा, लिखनी विधाता के केहू ना मेटाई ………. (टेक) आपन वाली करबू ना सुनबु घिघिआइल, त दर-दर के ठोकर खइबू फिरबू बिलाइल, हो जइबू कोढ़ी चाहे चरक फूटी जाई ………. (टेक) रतिया विरतिया में झंख तारी गोरिया, गइले दुकहिए पिया, पूरब की ओरिया ………. (टेक) चिठी पाती दिहले नाही, भेजले उदेशवा नाही टेलीफोनवो से दिहले खबरिया ………. (टेक) कइले कि आइबी हाले लेके धनि गहना, कुरती आ साया संगे हरियर चुनरिया ………. (टेक) ताक तानी राते दिने छत पर बइठी के, कहिया ले अइहे पिया, तेजि के शहरिया ………. (टेक) अब ना अगोरबि बेसी सुनि ल ‘अनारी’ हाले देने नइहर के धरबि डहरिया ………. (टेक)...

झुरू झुरू पछुवा ़़़

– गीत – झुरू झुरू पछुवा कड़ेर पुरवइया में, बाड़ा नीक लागेला टुटलकी मड़इया में ………. (टेक) गोल गाल गुलवरी के लगे कोलूहाड़ी छवरी के ओर पार लउके उखियाड़ी, होखेला लुकवली सरीसइया में केरइया में ………. (टेक) लइका ना चिन्हेले दिन दुपहरिया, भोरही में कुछुकेली कारी कोइलरिया, होखेली छुववलि तलवा में तलइया में ………. (टेक) डूबते सूरज मये काम जब ओराला, लोग बिटुराला त ढोलकी ठोकाला जुटेले ‘अनारी’ लोग गीत गवनइया में ………. (टेक) अब ना सहात बा, कोइलिया के बोलिया बोले बसवरिया पर भोर के पहरिया त लागे जइसे गोलिया ………. (टेक) सेजिया पर लोटेली काली रे नगीनिया, रोजा करनिनिए में उचटेली निनिया, मारेली ताना, मनमाना, जनाना, आ करेली ठिठोलिया ………. (टेक) सनन्-सनन् सन बहे पुरवइया, दाहा अइसन देह डोले जइसे डोले नइया, अखेड़ेला बाड़ा जब खाड़ा होके देखी कवनो गवने के कनिया ………. (टेक) जुल्मी जवानी के जोम ना अड़ाता, जीही की मरि जाई कुछु ना बुझाता, तुत ‘अनारी’ बेमारी बढ़वल बीतल फागुनो के होलिया ………. (टेक)             ...