फूल खिले लागल ़़़

– गीत – फूल खिले लागल, सुख मिले लागल, अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल कहीं कलि पर अलि बिहार करता, कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल …(टेक) धरती पीयर हो गइली दुल्हनिया नियर, ओस चमकेली चनिया के पनिया नीयर, बगिया में नबाब बनि गइले गुलाब, इ बुझाता धरती पर आकाश आ गइल …(टेक) नाया किसलय निकसले झरल पात जब, रट पपीहा लगवलसि बनत बात तब, रोज मलय पवन मन के पागल करे, घास पातो पर नाया सुबास आ गइल …(टेक) मन ना रोकले रोकाला रसदार भइले, रतिपति चारू ओर पहरेदार भइले, मस्त भइले ‘अनारी’ छठा देखि के, जे फलेवों रहल अनुका पास आ गइल …(टेक)...

माटी में मिलतावे ़़़

– गीत – माटी में मिलतावे, बापू के सपनवा, जाता रसातल में आपन वतनवा ………. (टेक) गाँधी बाबा सोचले रामराज हम ले आइबी, सोने चिरइया आपन हीरा के बनाइबी, सत्य अहिंसा के गावसु गानवा  ………. (टेक) आधा पेट खाके, अधवे पेन्ही-2 धोती लिहले आजादी बरिआई अपना होती, लोहा मानि गइले अंगरेज दुशुमनवा  ………. (टेक) मारि खइले गारी सुनले गइले जेहलखाना, जबरन आजादी के बिनले ताना बाना, जेकरा के पूजा करे संउसे जहानवा  ………. (टेक) राम अउरी कृष्ण अवतार जहा लिहले, बुद्ध, गुरूनानक उपदेश जहाँ दिहले, देवता लो धइले जहवां नरतनवा  ………. (टेक) जनवो से प्यारी धरती माई हमारी, कलपेली रोजो-2 झंखेले ‘अनारी’ गइले अखड़ेरे जहाँ केतने के जानवा  ………. (टेक)...

अमवा की डरिया ़़़

         – सरग से सुन्दर – अमवा की डरिया प बोले कोइलिया कगवा करेला कांव-कांव, सरग से सुन्दर बा मोर गांव। मुरगा जगावे रोज होत भोरहरिया, सजि के किसान चलें खेतवा की ओरिया, घुंघरू झनकि जाला बयला के गरवा खाले ऊंचे धरे जब पांव, सरग से सुन्दर बा मोर गांव। पिपरा क पाती नांचे ठीक दुपहरिया, चरर-मरर करे घन बंसवरिया, नदी की कछरिया में झाड़ झंखडि़या में, मोरवा नाचेला ठांव-ठांव, सरग से सुन्दर बा मोर गांव। गमके सीवान जब फूले सरसोइया, गेहुंआं क बाली झूमे लहरे केरइया, संझवा के बेला घरे अंगना के उपरा, चिरई करेली चांव-चांव, सरग से सुन्दर बा मोर गांव। मन बउराला देखि चइत महिनवां, सोनवां बिखरि जाला खेत खरिहनवां, देखि के भुलाइ जाला जिनगी क पिरवा, बालेदीन होइहें उभांव, सरग से सुन्दर बा मोर गांव।...

जनि सोच बिरना ़़़

                  – दहेज गीत – जनि सोचा बिरना हमार बहिनीं कुंआर ना रही। खूनवां जराके हमें एम0 ए0 ले0 पढ़उलऽ, सपना हजार अंखिया में तूं सजउलऽ, आजु ऊ भइल तार-तार बहिनीं कुंआर ना रही। हमरे करनवां नऽ खेतवा बिकाई, गहना माई कऽ अब बान्हे ना धराई, हीरो होण्डा आई नऽ उधार बहिनी कुंआर ना रही। खाइ के जहर आपन तजबो परनवां, डोली पहुंचाइ दीहऽ नदिया किनरवां, मिली जइहें सजनां हमार बहिनीं कुंआर ना रही। एतना सुनत रोके बोलेला बिरनवां, धीर धरा बहिनीं लवटि अइहें दिनवां, असरा पर टीकल सनसार-बहिनीं कुंआर ना रही। रतिया अन्हरिया ई कहिया ले रहिहें, कहियो रवनवां दहेजवा क जरिहें, बालेदीन कहें बार-बार, बहिनीं कुंआर ना रही।...

देसवा के सरग ़़़

            – देसवा के सरग – देषवा के सरग बनाव ऽ हो हम सबसे कहीला। एक ही समान भयल सबकै जनमवां एक बाटे धरती और एक बा गगनवां सबहीं बा एक समझाव ऽ हो हम सबसे कहीला। चोरी घूसखोरी भ्रश्टाचार के भगायदा, जाति-पाति भेद-भाव भावनां मेटायदा, षिक्षा एक देष में चलावऽ हो हम सबसे कहिला। जनसंख्या रोक के प्रदूशण घटायदा, पापी बा दहेज एके जड़ से मेंटायदा, बिटिया के जहर न ऽ पिआवाऽ हो हम सबसे कहिला। आज क जवान हाथ मल पछतात बा, आगे पहाड़ पीछे खइये जनात बा, जिअते ना केहू के मुआव ऽ हो हम सबसे कहिला। —...