by Nazar | Aug 7, 2015 | Johar Maghari
– ग़ज़ल – इन्तज़ारे सुब्ह से ऐसे में घबराएं गे क्या रात के पिछले पहर साग़र छलक जाएं गे क्या आंधियां भी जिन चिरागों को न ठन्डा कर सकीं तेरे दामन की हवाओं से वह बुझ जाएं गे क्या जो जेहादे ज़िन्दगी में खेलते हैं मौत से वो तेरी तोपों से बन्दूक़ों से डर जाएं गे क्या अहले ज़र देते हैं क्या क्या दावते रंगीं फ़रेब उनकी साज़िश उनकी चालों में हम आ जाएं गे क्या अम्ने आलम के लिये एक मुस्तक़िल खतरा हैं जो झूठ है इन्सानियत पर वो तरस खाएं गे क्या खुल गया दुनिया पे अब शेखो बरहमन का फ़रेब वो धरम के नाम पर अब हमको कटवाएं गे क्या अहले हक़ को धमकियां दारो रसन की हैं अबस यूँ वो अज़मे आहनी से बाज़ आ जाएं गे क्या आ रही है इस चमन में भी बहारे बेखेज़ाँ ग़ुन्चे मुरझाएं गे क्या अब फूल कुम्हलाएं गे क्या मुतमइन फ़रदा से हम हो जाएंगे क्या वाक़ई सच बता जौहर वो दिन अब जल्द ही आएं गे क्या...
by Nazar | Aug 7, 2015 | Johar Maghari
– ग़ज़ल – हो जाएं जो सरगरमे अमल अहले ज़मीं और दुनिया यही हो जाएगी फिर कितनी हसीं और ऐ दिल तेरे हाथों हुआ बरबाद बहुत कुछ अब अपनी तबाही मुझे मन्ज़ूर नहीं और कह सुन के ज़रा आप ही अब उनको मनाएं दीवाने यहाँ से न चले जाएं कहीं और संगे दरे जानां भी यहीं खिंच के चला आए बढ़ जाए जो थोड़ा सा मेरा ज़ौक़े यक़ीं और एक रोज़ मेरे ख़ानए दिल में भी मकीं हो दिल में तेरी उल्फ़त के सिवा कुछ भी नहीं और सइयाद का बस जब नहीं चलता किसी सूरत फिर दाम बिछाता है वो हमरंगे ज़मीं और कहते हुए डरता हूँ ग़मे दिल का फ़साना सुनते हैं कहीं आप न हों चीं बजबीं और परदे से निकल कर कभी जलवा तो दिखा दे कुछ इसके सिवा आरज़ू जौहर को नहीं और...
by Nazar | Aug 6, 2015 | Johar Maghari
– गजल – यकीं हो गया बागबां के चलन से अभी दूर है मौसमे गुल चमन से करें साजिशें रहनुमा राहजन से नहीं काम चलने का अब मकरो फन से तेरी बज्मे रंगीं का क्या हश्र होगा अगर उठ गये हम तेरी अंजुमन से ये सच है तअल्लुक है जम–जम से मुझको मोहब्बत भी रखता हूँ गंगो जमन से कभी पत्थरों से न कुछ जर्ब पहुँची कभी चोट आई गुलो नस्तरन से सदाकत परस्ती है जब अपना मसलक हमें खौफ फिर क्यों हो दारो रसन से तुम्हारे लिये जिन्दगी वक्फ कर दी तुम्हें और क्या चाहिये अह्लेफन से तमाशा जरा देखिये सुब्हे नौ का एजाफा अंधेरे में है हर किरन से नहीं कुजकलाहों को दौरां शनासी निकलते हैं अब भी उसी बांकपन से हुआ खून जौहर मेरी हसरतों का जो पाला पड़ा एक पैमां शिकन से...