by Nazar | Aug 15, 2015 | Baba Govind Sahab
– कविता – सत्य सत्य सब कोइ कहे,सत का मरम न जानइ जय गोविन्द वहि सॉच जोइ सॉचै पहिचानइ खोजन चले विदेस देस तजि तन मन आशा सुत कलत्र धन धाम त्यागि जंगल में वासा गुरु पीर बहु किया दिया सब मिलि उपदेशा पूजा लेंहि बनाइ छुटे नहि नियत कलेशा षट् दर्शन व्रत नेम तीर्थ जप जोग बतावहिं झूठी बात बताय काठ पत्थर पुजवावहिं कोइ मस्जिद कोइ गौर देवघरा माथ नवावहिं धाय मरै पछतायं उहॉ कछु फल ना पावहिं जय गोविन्द की बात तिनहि को लगिहैं प्यारी जिन तन मन धन प्रान सकल निर्बल पर वारी...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Soond Faizabadi
– तुम्हारे बिना – लगता नहीं फागुन में मन टेस्ट मैच हो गया जीवन तुम्हारे बिना बाग और बगीचे में खुशियों का अपहरण फिल्डिंग करता वातावरण धड़क रही खिड़की किन्तु द्वार शम–दम घर लगता स्टेडियम दर्शक दीवानों में कौतुक उभरा पिच लगता बिस्तरा बालिंग के नये अन्दाज सजग बल्लेबाज भटक रहा गें सा यौवन तुम्हारे बिना कोकिल पपीहे सब सुना रहे कमेन्टरी बिरहा बना रहा सेन्चुरी मधुर टीस मार रही छक्के छूट गये धीरज के छक्के चौका लगा रही वेदना मन होता अनमना पवन बार–बार करे शोर बढ़ता स्कोर पहरे पर पुलिस पलाशवन तुम्हारे बिना मन हुआ कैच आउट अभिलाषा रन आउट मिलन एल०बी०डब्लू० हुआ इच्छा को फ्लू आ आ क्लीन बोर्ड हो गया अनुमान घबड़ाया कप्तान बच गया फालोआन फिर भी उदासी सुना होगा तुमने भी मेरे ब्रजवासी रन को टटोल वह सात मधुबन टेस्ट मैंच हो गया जीवन तुम्हारे बिना ।...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Soond Faizabadi
मेरे बाप हे मेरे परम पूजनीय बाप आखिर कब मरेंगे आप यदि आप अभी मर जाते बेटे पर उपकार कर जाते रिटायर होने के बाद आप बीस वर्षों से लगातार जी रहे हैं रोजाना एक किलो दूध पी रहे हैं सरकारी दूकान का सारा राशन आप ही खा रहे हैं हम तो महाभारत की लड़ाई में जूझ रहे हैं आप रामायण गा रहे हैं हम उधारी के लिये दर–दर दाँत दिखा रहे हैं आप बैठे–बैठे नकली दाँत बजा रहे हैं बेवजह, बे मतलब शारे कर रहे हैं हम लोगों को क्यों बोर कर रहे हैं मेरे ऊपर घर के बारह सदस्यों का भार है ऊपर से आप का भूत सवार है और तो और लकड़ी भी बाजार से गायब हो गई कफन का दाम रोजाना बढ़ रहा है कर्ज का बोझ बार–बार चढ़ रहा है यदि साल दो साल आप और रह जायेंगे सच मानिये हम मर जायेंगे आप के साथी संघाती कभी के चले गये मगर आप खार खाए बैठे हैं हमें मालूम है आप के चमचे यमराज के कार्यालय में बैठे हैं कुछ दे दिलाकर आप ने अपनी फाइल गायब कराई है जीने के लिये कैसी बेहयाई है हे मेरे बच्चों के दादा सपरिवार प्रार्थना करता हूँ हाथ जोड़ता हूँ पाँव पड़ता हूँ हम सब पर कृपा करें आप शीघ्र से शीघ्र मरें आप हे मेरे बाप ।...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Soond Faizabadi
चुम्बन और झापड़ गली के मोड़ पर एक आलीशान दुकान तीन ग्राहक विद्यमान– वृद्धा, तरुणी, जवान सामानों के बी उलझा हुआ दूकानदार चल रहा लेन–देन बात व्यवहार अचानक बिजली गुल हुई ज्योति उड़ी, धुआँधार निविड़ अन्धकार स्याही में सभी डूबने लगे अन्धेरे में जवान को सूझा मजाक एक प्यारा उसने अपने हाथ का चुम्बन लिया दूकानदार को एक झापड़ मारा चुम्बन और झापड़ गूँज उठा यों लाभ और घाटा लड़खड़ा उठा सन्नाटा बुढ़िया सोचने लगी चरित्रवती युवती ने उचित व्यवहार किया चुम्बन का झापड़ से जवाब दिया तरुणी सोचने लगी हाय रे मूर्ख नादान, अजनबी, अन्जाना मुझे छोड़ कर बुढ़िया पर मर मिटा बेचारा अनायास पिटा और दूकानदार पछताता हुआ अपना गाल सहलाता हुआ सोच–सोच कर रहा है गम चुम्बन किसने लिया हाय पिटे हम...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Pankaj Vatsyayan
नाग यज्ञ होगा दोबारा व्याल रूप इंसान आज साक्षात् देखकर आया हूँ। गिरगिट कैसे रंग बदलता आज देखकर आया हूँ।। बदल रहे मौसम की मैनें आज हकीकत देखी है। संबंधों के उपवन को बर्बाद देखकर आया हूँ।। पाल रखे थे आस्तीन में दिल पर सीधा वार हुआ। विष से मन का हाल बुरा है डंक झेलकर आया हूँ।। कह दो पंकज दुनिया से अब ये गल्ती फिर ना होगी। मानवता का पृष्ठ फाड़कर आज फेंककर आया हूँ।। अब मिलना तो बचकर मिलना जन्मेजय फिर से जिन्दा है। नाग यज्ञ होगा दोबारा खुद से बोलकर आया हूँ।। ...