by Nazar | Aug 9, 2015 | Amarnath Hamsafar
– गीत – बाप से बेटा अलग है चन्द पैसों के लिये सन्त के बाने में ठग है चन्द्र पैसों के लिये बाप से बेटा अलग है —– किसी की किस्मत फूटी जाये, किसी की अस्मत लूटी जाये कहीं पर ममता का हो खून, इसी से लूट हुई है दून, कोर्ट में चलते झूठे केस, पुलिस लूटते बदल कर भेष, फंस गया सारा ही जग है बाप से बेटा अलग है —– गलत लोगों का होता मान, टूटते रिश्तों का ईमान, बचाते गुनहगार को लोग, पहन कर न्याय कर्म का चोंग, मरे मानुष की लेते फीस, डाक्टर बने हुए दस शीश नग्नता ही रोम रग है बाप से बेटा अलग है —–...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Amarnath Hamsafar
– गीत – हमने कहाँ से आग लगाना सीख लिया बेबस पर ही दाग लगाना सीख लिया हमने कहाँ से आग —– मन्दिर मस्जिद औ गुरुद्वारे, बनते हैं नित साँझ सकारे दौलत की खातिर ही हमने, कितनों के घर द्वार उजाड़े लाचारों में भाग लगाना सीख लिया हमने कहाँ से आग —– गीता और कुरान भुलाकर, क्यों पावन ईमान भुलाकर अम्न चैन को ठोकर दे कर, स्वारथ की दूकान लगाकर पहरे पर क्यों नाग लगाना सीख लिया हमने कहाँ से आग —– गैरों को ही गले लगा कर, अपने रस्म रिवाज गँवा कर सुखमय अरमानों की खातिर, सबको सूली ताक चढ़ा कर अजब रुधिर का फाग लगाना सीख लिया हमने कहाँ से आग —–...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Alladh Bikaneri
दिल्ली तो करोड़ों दिल वालों की नगरिया है कोई ले दिमाग़ से क्यों काम मेरे राम जी भूले से, यहाँ जो चला आए एक बार कोई जाने का कभी न लेगा नाम मेरे राम जी पाँव रखने को मेट्रो रेल में जगह कहाँ जाम हुईं सड़कें तमाम मेरे राम जी जाम से भला क्यों घबराएँ कार वाले, यहाँ कारों में छलकते हैं जाम मेरे राम जी ...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Alladh Bikaneri
लोन से लिया है फ़्लैट, लोन से ख़रीदी कार सूई भी ख़रीदी न नक़द मेरे राम जी लोन से पढ़ाए बच्चे, लोन से ख़रीदे कच्छे मांगी नहीं यारों से मदद मेरे राम जी क़िस्त न भरी तो गुण्डे ले गए उठा के कार घटनी थी घटना दुखद मेरे राम जी गमलों में काँटेदार कैक्टस उगाए मैंने पाऊँ अब कहाँ से शहद मेरे राम जी ...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Alladh Bikaneri
डाकू नहीं, ठग नहीं, चोर या उचक्का नहीं कवि हूँ मैं मुझे बख्श दीजिए दारोग़ा जी काव्य-पाठ हेतु मुझे मंच पे पहुँचना है मेरी मजबूरी पे पसीजिए दारोग़ा जी ज्यादा माल-मत्ता मेरी जेब में नहीं है अभी पाँच का पड़ा है नोट लीजिए दारोग़ा जी पौन बोतल तो मेरे पेट में उतर गई पौवा ही बचा है इसे पीजिए दारोग़ा जी ...