by Nazar | Aug 8, 2015 | Safvi Barabankavi
– ग़ज़ल – सैयाद भी चमन में है और बाग़बाँ भी आज फिकरे बहार भी है ग़मे आशियाँ भी आज सहबाए लुत्फ दोस्त से सरशार थे जो कल दामन कुशाँ है उनसे मए अरग़वाँ भी आज उफ तेरी सादगी की ये रानाई तमाम हैं शर्मसार तुझसे महो कहकशाँ भी आज शरहे जमाले यार किसी से न हो सकी जुम्बिश आ के रह गये कौनो मकाँ भी आज सफवी ये इन्क़लाबे ज़माना का है असर मुँह फेरते हैं मुझसे मेरे मेह्रबाँ भी आज (नवम्बर 1960)...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Safvi Barabankavi
– ग़ज़ल – ज़ुल्म ढाते हैं वो आसमाँ की तरह हम तड़पते हैं एक बेज़बाँ की तरह किस से अब शिकवए बेवफाई करें पेश आते हैं वो मेह्रबाँ की तरह उनकी चश्मे करम हो गई ग़ैर पर हम तड़पते रहे नीम जाँ की तरह वो बबातिन तो कुछ मेह्रबाँ हैं मगर उनकी नज़रें हैं ना मेह्रबाँ की तरह साथ सफ़वी के मैखानए इश्क़ में शेख भी आए पीरे मोग़ाँ की तरह (9 जनवरी 1961)...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Safvi Barabankavi
– ग़ज़ल – शिकवए तन्ज़ीमे गुलशन क्या करें गुल्सिताँ वालों से अनबन क्या करें हमको दुनिया छोड़ने का ग़म नहीं छुट रहा है तेरा दामन क्या करें ज़ुल्फे शब गों के तसव्वर से भी अब बढ़ रही है दिल की उलझन क्या करें या एलाही खातमा बिलखैर हो जी के अब दुनिया को बदज़न क्या करें शौक है मन्जि़ल का ऐ सफ़वी मगर राहबर भी अब है रहज़न क्या करें (02-01-1959)...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Safvi Barabankavi
– ग़ज़ल – न रो ऐ दिल कहीं रोने से तक़दीरें बदलती हैं ज़ियाए रंगो रोग़न से ये तस्वीरें बदलती हैं तुम्हीं ने प्यार बखशा था तुम्हीं ने फेर ली आँखें बहर सूरत मेरे ख्वाबों की ताबीरें बदलती हैं असर अन्दाज़ तो ऐ गर्दिशे अइयाम क्या होगी कहीं तदबीर से क़िस्मत की तहरीरें बदलती हैं न पूछो अहले गुलशन से कि आकर सेहने गुलशन में बदल जाते हैं दीवाने कि ज़नजीरें बदलती हैं मुहब्बत में एक ऐसा वक़्त भी आता है ऐ सफ़वी कि अज़खुद नारसा आहों की तासीरें बदलती हैं (31 दिसम्बर 1959)...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Yaseen Ghayal
– गजल – जिस जुबां पे न हो जिक्र तेरा सनम उस जुबां में लहू आदमी का नही प्यार की तेरे जिस दिल में खुशबू न हो दिल वो पत्थर है पत्थर महकता नही बज्मे शादाब से उठके तुम क्या गये बज्मे शादाब में खामुशी हो गयी कोई पायल वहॉ आज बजती नही कोई कंगन वहॉ अब खनकता नही गेसुओं वाले जब तक तेरा साथ था मेरे एहसास में धूप भी छॉव थी साथ छूटा तेरा तो गजब हो गया कोई साया मेरे हक में साया नही फूल मुरझा गया तो खिलेगा कहॉ और दिल टूटा तो फिर मिलेगा कहॉ दिल को मेरे न इतना उछाला करो दिल है प्यारे ये कोई खिलौना नही बात गुलशन के फूलों से मैं क्या; करूं बात तुझसे जो होती तो कुछ बात थी चॉद तारे मुझे खुशनुमा क्यूं लगें सामने जब मेरे तेरा चेहरा नही मैने जाना तुझे मैने माना तुझे तू मुझे जान ले तू मुझे मान ले लग्जिशों पे न आ अपने घायल के तूं तेरा घायल है इंसा फरिश्ता नही ...