by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
– ग़ज़ल – माना कि उनसे दूर का भी वास्ता नहीं राहें जुदा जुदा सही मन्जि़ल जुदा नहीं तूफाँ डरा रहा है हमें क्यों ये बार बार क्या उसका ही खुदा है हमारा खुदा नहीं गिरने के बाद उठने की उम्मीद है मगर नज़रों से गिर गया जो कभी फिर उठा नहीं आराम गाहे ताज यह जमना की खामशी शब भर की चाँदनी से अभी दिल भरा नहीं तेरे बग़ैर क्या कहें अब ज़िन्दगी का हाल कटने को कट रही है मगर कुछ मज़ा नहीं उनका खयाल उनकी तमन्ना उन्हीं का ग़म क्या चीज़ की कमी है मेरे पास क्या नहीं सालिक ये कहता रह गया कर दीजिये मुआफ़ कहने को मैं बुरा हूँ मगर दिल बुरा नहीं...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
– ग़ज़ल – न कोई चेहरा न पत्थ्रर न आइना हूँ मैं तेरी निगाह में आखिर बता कि क्या हूँ मैं चलो यह माना कि कश्ती के नाखुदा तुम हो बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं कनारे आके सफ़ीने के साथ डूब गया बड़ा गुरूर था कहता था नाखुदा हूँ मैं यह सोचता हूँ तो दिल डूबने सा लगता है कि रंगे खून तो एक है मगर जुदा हूँ मैं तुम अच्छे लोगों को ढूँढो न ढूँढ पाओगे हमेशा मैं ही मिलूँगा बहुत बुरा हूँ मैं लगा लो सीने से या बेरुखी से बात करो करो सोलूक जो चाहो अब आ गया हूँ मैं यह जानकर कि वह बेगाना हो गया सालिक न जाने क्यों उसे अपना ही कह रहा हूँ मैं...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
– ग़ज़ल – फ़रेब खाए हैं इतने कि कुछ शुमार नहीं हमें अब अपने ही साये पे एतबार नहीं दिखावा प्यार का करते हैं सब जहाँ वाले किसी के दिल में किसी के लिये भी प्यार नहीं किसी के हिस्से में गुल है किसी के हिस्से में खार बहार कहने को कहिये मगर बहार नहीं किसी के ग़म पे किसी को खुशी का हक़ हासिल किसी को ग़म भी मनाने का अख्तियार नहीं हमें न समझो हमें देख कर न पहचानो हमारे चेहरे पे इतना अभी गुबार नहीं सुकनो–अम्नो–अमां ढूँढने कहाँ जायें जिधर भी देखिये हालात साज़गार नहीं शरीके ग़म वही अपना हुआ है ऐ सालिक कि जिसके दिल में हमारी तरह क़रार नहीं...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
– ग़ज़ल – जो मुहब्बत से दी नहीं जाती वह तबीयत से पी नहीं जाती एक ही घूँट हो मुहब्बत से उम्र भर बेखुदी नहीं जाती प्यार दुनिया में बाँटते रहिये दिल में यह शै रखी नहीं जाती दिल तो कहता है और थोड़ी सी इतनी पी है कि पी नहीं जाती कुछ तो आदाबे गुफ़तगू सीखो इस तरह बात की नहीं जाती बस उसी से कि जिससे कहना है दिल की हालत कही नहीं जाती जाने वाला तो जा चुका सालिक एक उसकी कमी नहीं जाती...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
– ग़ज़ल – फ़रेब खाए हैं इतने कि कुछ शुमार नहीं हमें अब अपने ही साये पे एतबार नहीं दिखावा प्यार का करते हैं सब जहाँ वाले किसी के दिल में किसी के लिये भी प्यार नहीं किसी के हिस्से में गुल है किसी के हिस्से में खार बहार कहने को कहिये मगर बहार नहीं किसी के ग़म पे किसी को खुशी का हक़ हासिल किसी को ग़म भी मनाने का अख्तियार नहीं हमें न समझो हमें देख कर न पहचानो हमारे चेहरे पे इतना अभी गुबार नहीं सुकनो–अम्नो–अमां ढूँढने कहाँ जायें जिधर भी देखिये हालात साज़गार नहीं शरीके ग़म वही अपना हुआ है ऐ सालिक कि जिसके दिल में हमारी तरह क़रार नहीं...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Islam Salik
नाम – इस्लाम सालिक जन्म – 15 नवम्बर 1947, फैजाबाद (उ०प्र०) शिक्ष्ा – बी०ए०, एल०एल०बी० प्रकाशित पुस्तक – बरफीली धूप (माण्डवी प्रकाशन गाजियाबाद) पता – मिर्जापुर, मुमताज़ नगर, जिला– फैज़ाबाद (उ०प्र०) पिन – 224001 मोबाइल नं० 9305261266...