तआरुफ ⁄ परिचय

नाम – असग़र हुसैन गोण्डवी पिता का नाम – तफज्जुल हुसैन तखल्लुस – असग़र गोण्डवी शिक्षा – 8 वीं पास जन्म – सन् 1884, गोण्डा (उ०प्र०) मृत्यु – सन् 1936...

तआरुफ ⁄ परिचय

– तआरुफ – नाम–           कमालुद्दीन कमाल जन्म स्थान–  पिपरापुर, गोरखपुर (उ०प्र०) 273001 रुचि –          गज़लकार मो०नं०–       9695148513...

तआरुफ

नाम–           मुहम्मद यासीन तखल्लुस –  यासीन घायल आरिबपुरी जन्म –        25–02–1930 पता –         ग्राम व पो. आरिबपुर हँसवर जि.अम्बेडकर नगर उ०प्र० पेशा –     पूर्व शिक्षक (मजाहरे हक हीरापुर मुण्डेरा अम्बेडकर नगर)...

रन्जो आलाम से ़़़

                      ग़ज़ल रन्जो आलाम से घबरा के जो डर जाते हैं सच में ऐ दोस्त इसी गम में वो मर जाते हैं दिन में बुनते हैं खयालात का ताना बाना रात में दर्द की मानिन्द बिखर जाते हैं कितने खुदगर्ज हैं वो लोग जो लालच दे कर वक्त पडृने पे यहाँ हंस के मुकर जाते हैं दिन के औकात जो दफतर के लिये लिक्खे हैं खुशनुमा शाम जो आ जाये तो घर जाते हैं अब चले आओ कि रंगीन हैं शामें अपनी साथ होते हो तो गम सारे निखर जाते हैं रोज करते हैं जो एलान वो फरदन फरदन बात जब आए सवालों की सुधर जाते हैं फब्तियां कसते हैं एहसास जो मेरे ऊपर शेरगोई पे मेरे झुक के गुजर जाते हैं...

तुम्हारे बिना ़़़

– तुम्हारे बिना – लगता नहीं फागुन में मन टेस्ट मैच हो गया जीवन तुम्हारे बिना बाग और बगीचे में खुशियों का अपहरण फिल्डिंग करता वातावरण धड़क रही खिड़की किन्तु द्वार शम–दम घर लगता स्टेडियम दर्शक दीवानों में कौतुक उभरा पिच लगता बिस्तरा बालिंग के नये अन्दाज सजग बल्लेबाज भटक रहा गें सा यौवन तुम्हारे बिना कोकिल पपीहे सब सुना रहे कमेन्टरी बिरहा बना रहा सेन्चुरी मधुर टीस मार रही छक्के छूट गये धीरज के छक्के चौका लगा रही वेदना मन होता अनमना पवन बार–बार करे शोर बढ़ता स्कोर पहरे पर पुलिस पलाशवन तुम्हारे बिना मन हुआ कैच आउट अभिलाषा रन आउट मिलन एल०बी०डब्लू० हुआ इच्छा को फ्लू आ आ क्लीन बोर्ड हो गया अनुमान घबड़ाया कप्तान बच गया फालोआन फिर भी उदासी सुना होगा तुमने भी मेरे ब्रजवासी रन को टटोल वह सात मधुबन टेस्ट मैंच हो गया जीवन तुम्हारे बिना ।...

मेरे बाप ़़़

         मेरे बाप हे मेरे परम पूजनीय बाप आखिर कब मरेंगे आप यदि आप अभी मर जाते बेटे पर उपकार कर जाते रिटायर होने के बाद आप बीस वर्षों से लगातार जी रहे हैं रोजाना एक किलो दूध पी रहे हैं सरकारी दूकान का सारा राशन आप ही खा रहे हैं हम तो महाभारत की लड़ाई में जूझ रहे हैं आप रामायण गा रहे हैं हम उधारी के लिये दर–दर दाँत दिखा रहे हैं आप बैठे–बैठे नकली दाँत बजा रहे हैं बेवजह, बे मतलब शारे कर रहे हैं हम लोगों को क्यों बोर कर रहे हैं मेरे ऊपर घर के बारह सदस्यों का भार है ऊपर से आप का भूत सवार है और तो और लकड़ी भी बाजार से गायब हो गई कफन का दाम रोजाना बढ़ रहा है कर्ज का बोझ बार–बार चढ़ रहा है यदि साल दो साल आप और रह जायेंगे सच मानिये हम मर जायेंगे आप के साथी संघाती कभी के चले गये मगर आप खार खाए बैठे हैं हमें मालूम है आप के चमचे यमराज के कार्यालय में बैठे हैं कुछ दे दिलाकर आप ने अपनी फाइल गायब कराई है जीने के लिये कैसी बेहयाई है हे मेरे बच्चों के दादा सपरिवार प्रार्थना करता हूँ हाथ जोड़ता हूँ पाँव पड़ता हूँ हम सब पर कृपा करें आप शीघ्र से शीघ्र मरें आप हे मेरे बाप ।...