चुम्बन और झापड़ ़़़

      चुम्बन और झापड़ गली के मोड़ पर एक आलीशान दुकान तीन ग्राहक विद्‍यमान– वृद्धा, तरुणी, जवान सामानों के बी उलझा हुआ दूकानदार चल रहा लेन–देन बात व्यवहार अचानक बिजली गुल हुई ज्योति उड़ी, धुआँधार निविड़ अन्धकार स्याही में सभी डूबने लगे अन्धेरे में जवान को सूझा मजाक एक प्यारा उसने अपने हाथ का चुम्बन लिया दूकानदार को एक झापड़ मारा चुम्बन और झापड़ गूँज उठा यों लाभ और घाटा लड़खड़ा उठा सन्नाटा बुढ़िया सोचने लगी चरित्रवती युवती ने उचित व्यवहार किया चुम्बन का झापड़ से जवाब दिया तरुणी सोचने लगी हाय रे मूर्ख नादान, अजनबी, अन्जाना मुझे छोड़ कर बुढ़िया पर मर मिटा बेचारा अनायास पिटा और दूकानदार पछताता हुआ अपना गाल सहलाता हुआ सोच–सोच कर रहा है गम चुम्बन किसने लिया हाय पिटे हम...

पुलिस चमड़े का ़़़

– व्यंग कविता – पुलिस चमड़े का सिक्का चलाय रही है और फर्जी इन्काउन्टर देखाय रही है बेगुनाहों को खूब सताय रही है तथा गुन्डों से दामन बचाय रही है शायरी जुगनू की आँसू बहाय रही है शायरी जुगनू की —– नौकर शाही रिश्वत में नहाय रही है इमदाद की वह सारी रकम खाय रही है काग़ज़ी घोड़ा खुश्की में दौड़ाय रही है और जनता को अंगूठा दिखाय रही है शायरी जुगनू की —– झिल्ली सुरा की शोर मचाय रही है मस्ती मांझी की नइया डुबाय रही है गुन्डई गंगू की रंग जमाय रही है इन्सानियत बेचारी लुकाय रही है शायरी जुगनू की —–...

फसाद की कड़ी है ़़़

– व्यंग – फसाद की कड़ी है जादू की छड़ी है घोटालों की जड़ी है अंखियाँ तवायफ से लड़ी हैं नेता बदबू देता, नेता बदबू देता नेता बदबू देता —– टेम्पो इसका हाई है तगड़ी इसकी कमाई है हिस्से में मलाई है इबलीस का भाई है नेता बदबू देता, नेता बदबू देता नेता बदबू देता —– झूठ फरेब का मिक्चर है धोखाधड़ी का पैकर है इसका हसीन लेक्चर है जेब में दारू टिन्चर है नेता बदबू देता, नेता बदबू देता नेता बदबू देता —–...

धरती का है स्वर्ग ़़़

– गीत – धरती का है स्वर्ग जहाँ, आपस में भाई चारा भारत का दिल जिसको कहते वह है गाँव हमारा भारत का दिल जिसको —– सभी धर्म के लोग जहाँ आपस में मिल के रहते मिट्टी को ही सोना समझें खेतों में मन बहके शादी ब्याह में एक जुटता का चलता जंह भण्डारा भारत का दिल जिसको —– होली का त्योहार हो चाहे ईद मिलन का नाता दीवाली हो चाहे मुहर्रम सुख दुख में सब भ्राता संकट में एक दूजे को देते हैं जहाँ सहारा भारत का दिल जिसको —– साम्प्रदायिक सद्भाव जहाँ है प्रेम का बहता दोना प्रकृति की है छटा निराली विहंसे हर एक कोना गाय भैंस हैं जहाँ विचरते दूध की बहती धारा भारत का दिल जिसको —– अमराई में कोयल कूके खेत में नाचे मोर प्रेम की जलती दीया बाती जहाँ न होता शोर एकजेहती का रूप सफ़र है अम्न आँख का तारा भारत का दिल जिसको —–...

वृक्षारोपण करो धरा पर ़़़

– वृक्षारोपण – वृक्षारोपण करो धरा पर सुखमय यह संसार करो जीवन का आधार वृक्ष है प्रदूषण उपचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हर मानव एक वृक्ष लगाये देख के मन आह्लादित हो हरी भरी धरती हो अपनी वनों से यह आच्छादित हो वन्य जीव जनतुओं का अपने कभी नहीं संहार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– दस वृक्षों को अगर लगाएं पाएंगे सब पुण्य सन्तान धरा पे जितने वृक्ष लगेंगे सुख पाये उतना इन्सान प्राण दायिनी वायु वृक्ष है इस पर जरा विचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– पानी की फिर कमी न होगी ऊसर भूमि लहरायेगी शस्य श्यामला बनेगी धरती प्रकृति परी मुस्कायेगी वृक्ष धरा का आभूषण है लगा के सब श्रृंगार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हरे भरे वन वृक्ष न काटो वरना सब पछताओगे सूखा बाढ़ भूकम्प सुनामी लहरों से दुख पाओगे वृक्ष लगा के सफ़र धरा पर जीवन का उद्धार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —–...

मानव मानव भेद जो करता ़़़

– कविता – मानव मानव भेद जो करता वह न पाता कभी भी कल है प्रेम अहिन्सा भाई चारा एकजेहती का रूप विमल है देश के हित में सर जो कटाते राष्ट्र प्रेम वह महा प्रबल है प्यासे मन को तृप्ति जो कर दे वह ही उसका गंगाजल है पर दुख से द्रवित जो हृदय करुणा की वह मूर्ति सकल है धैर्य व साहस जिसमें होता उसके हर संकट का हल है कर्तव्य के पथ पर सदा जो चलता वह मानव बढ़ता प्रतिपल है उसी वृक्ष की पूजा होती जो कि देता मीठा फल है घटा जो छा के भू पर बरसे समझो कि वह ही बादल है सदा समय से काम जो करता वह खुश रहता हर एक पल है उसी का जीवन बना सार्थक जिसके बांहों में निज बल है भाग्य सहारे जो भी रहता हर कामों में रहा विफल है दो दिल धड़कन एक जो कर दे सफ़र वो समझो एक गजल है...