by Nazar | Oct 18, 2015 | Homepage
– ग़ज़ल – आलम ही और था जो शनासाइयों में था जो दीप था निगाह की परछाइयों में था वो बेपनाह ख़ौफ़ जो तनहाइयों में था दिल की तमाम अन्जुमन आराइयों में था एक लम्हए-फ़ोसूँ ने जलाया था जो दिया फिर उम्र भर ख़याल की रानाइयों में था एक ख़्वाब गूँ थी धूप थी ज़ख़्मों की आँच में एक सायेबाँ सा दर्द की पुरवाइयों में था दिल को भी एक जराहते-दिल ने अता किया ये हौसला कि अपने तमाशाइयों में था कटता कहाँ तवील था रातों का सिलसिला सूरज मेरी निगाह की सच्चाइयों में था अपनी गली में क्यों न किसी को वो मिल सका एतमाद बादिया-पैमाइयों में था इस अह्दे ख़ुद सिपास का पूछो न माजरा मसरूफ़ आप अपनी पज़ीराइयों में था उसके हुज़ूर शुक्र भी आसाँ नहीं अदा वो जो ग़रीबे-जान मेरी तनहाइयों में था —– (शायरा- स्व0 अदा जाफरी,...
by Nazar | Oct 18, 2015 | Homepage
– ग़ज़ल – मैं किस मन्जि़ल पे पहुँचा हूँ खुदारा देखते जाओ सहारा पा के भी हूँ बे सहारा देखते जाओ हुए तुम किस लिये बरहम खुदारा ये तो बतलाओ हमें ये बरहमी भी है गवारा देखते जाओ मुबारक हो तुम्हें जश्ने बहाराँ ऐ चमन वालो मगर अब जल रहा है घर हमारा देखते जाओ मोहब्बत को मोहब्बत की नज़र से लूटने वालो किया किस हाल में हमने गुज़ारा देखते जाओ कोई देखे न देखे हाले सफ़वी ग़म नहीं लेकिन तड़पता है तुम्हारे ग़म का मारा देखते जाओ ––– (शायर– सफ़वी बाराबंकवी...
by Nazar | Oct 12, 2015 | Homepage
– ग़ज़ल – उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वह भी मेरी ही तरह शहर में तनहा होगा इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे रौशनी खत्म न कर आगे अन्धेरा होगा प्यास जिस नहर से टकराई वो बन्जर निकली जिसको पीछे कहीं छोड़ आये वो दरिया होगा मेरे बारे में कोई राय तो होगी उसकी उसने मुझको भी कभी तोड़ के देखा होगा एक महफिल में कई महफिलें होती हैं शरीक जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा (शायर– निदा...
by Nazar | Oct 11, 2015 | Homepage
– ग़ज़ल – अजब अपना हाल होता जो विसाले यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता कोई फ़ितना ता कयामत न फिर आशकार होता तेरे दिल पे काश ज़ालिम मुझे अख्तियार होता जो तुम्हारी तरह तुमसे कोई झूटे वादे करता तुम्हीं मुन्सफी से कह दो तुम्हे एतबार होता ? ग़मे इश्क में मज़ा था जो उसे समझ के खाते ये वो जहर है कि आखिर मये खुशगवार होता न मज़ा है दुश्मनी में न है लुत्फ दोस्ती में कोई गैर ग़ैर होता कोई यार यार होता ये मज़ा था दिल्लगी का कि बराबर आग लगती न तुझे क़रार होता न मुझे क़रार होता तेरे वादे पर सितमगर अभी और सब्र करते अगर अपनी ज़िन्दगी का हमें एतबार होता ये वो दर्दे दिल नहीं है कि हो चारा साज़ कोई अगर एक बार मिलता तो हज़ार बार होता गये होश तेरे ज़ाहिद जो वो चश्मे–मस्त देखी मुझे क्या उलट न देती जो न बादा–ख्वार होता मुझे मानते सब ऐसा कि अदू भी सजदे करते दरे यार काबा बनता जो मेरा मज़ार होता तुम्हें नाज़ हो न क्यों कर कि लिया है दाग़ का दिल ये रक़म न हाथ लगती न ये इफ्तेखार होता ––– (शायर– दाग़...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Homepage
नाम – अली सरदार जाफ़री जन्म – 29 नवम्बर 1913 जन्म स्थान – बैरनपुर (बलरामपुर), उ०प्र० स्वर्गवास – 01 अगस्त 2000 शिक्षा – स्नातक (ग्रेजुएट) पुस्तक – नई दुनिया को सलाम अवार्ड – ज्ञानपीठ अवार्ड 1997...
by Nazar | Sep 29, 2015 | Homepage
– तआरुफ – नाम – सैयद अहमद शाह कलमी नाम – अहमद फ़राज़ जन्म – 12 जनवरी 1931 मृत्यु – 25 अगस्त 2008 शिक्षा – एम०ए० उर्दू एवं पर्शियन पेशा – उर्दू शायर, लेक्चरर...