by Nazar | Aug 25, 2015 | Homepage
नाम- बृजमोहन प्रसाद ‘अनारी’ पिता का नाम- स्व0 केदार प्रसाद माता का नाम- श्रीमती जगेश्वरी देवी स्थायी निवास- ग्राम-कुम्हियां, पोस्ट-भरखरा, जिला-बलिया, उत्तर प्रदेश, पिन कोड-277304 पत्र व्यवहार का पता- ग्राम-कुम्हियां, पोस्ट-भरखरा, जिला-बलिया, पिन कोड-277304 जन्म तिथि- 01.07.1959 शिक्षा- बी0ए0, बी0टी0सी0 पेशा- शिक्षण, साहित्य सर्जना रचित पुस्तकें- 1. जिनगी के थाती 2. आसरा के दियना 3. सितुही में मोती 4. अँखियन के लोर 5. धरम के धाजा सम्मान- उ0 प्र0 हिन्दी संस्थान लखनऊ से ‘भिखारी ठाकुर सर्जना’ एवं ‘राहुल सांकृत्यायन’ के साथ देश के अनेकों संस्थाओं व व्यक्तियों से सम्मानित। मो0 नं0- 09450953545...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Homepage
– गीत – सीता, सावित्री हमही बनबी मीराबाई जनि मुववाव माई खाके दवाई ………. (टेक) करबू कुकरम लागी भारी हतियारी, देबे लगिहे गारी पाता लागते ‘अनारी’ जहर होई जिनगी चलबू मुंह चोरवाई ………. (टेक) छोडि़ देबू जियत त बाजी कहियो बाजा, आई बरिआति संगे रही हे दुलहा राजा, गारी गवाई दुअरा बाजी शहनाई ………. (टेक) पीतर नेवतबू तु मानर पूजि के लावा मेरइहे भइया देबू जवन भुजि के, दीहे कनिया दान पापा जाॅघ पर बइठाई ………. (टेक) बेटी हम बन तानी, हमरो अफसोस बा, लेता दहेज त समाज के न दोष बा, लिखनी विधाता के केहू ना मेटाई ………. (टेक) आपन वाली करबू ना सुनबु घिघिआइल, त दर-दर के ठोकर खइबू फिरबू बिलाइल, हो जइबू कोढ़ी चाहे चरक फूटी जाई ………. (टेक) रतिया विरतिया में झंख तारी गोरिया, गइले दुकहिए पिया, पूरब की ओरिया ………. (टेक) चिठी पाती दिहले नाही, भेजले उदेशवा नाही टेलीफोनवो से दिहले खबरिया ………. (टेक) कइले कि आइबी हाले लेके धनि गहना, कुरती आ साया संगे हरियर चुनरिया ………. (टेक) ताक तानी राते दिने छत पर बइठी के, कहिया ले अइहे पिया, तेजि के शहरिया ………. (टेक) अब ना अगोरबि बेसी सुनि ल ‘अनारी’ हाले देने नइहर के धरबि डहरिया ………. (टेक)...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Homepage
– गीत – झुरू झुरू पछुवा कड़ेर पुरवइया में, बाड़ा नीक लागेला टुटलकी मड़इया में ………. (टेक) गोल गाल गुलवरी के लगे कोलूहाड़ी छवरी के ओर पार लउके उखियाड़ी, होखेला लुकवली सरीसइया में केरइया में ………. (टेक) लइका ना चिन्हेले दिन दुपहरिया, भोरही में कुछुकेली कारी कोइलरिया, होखेली छुववलि तलवा में तलइया में ………. (टेक) डूबते सूरज मये काम जब ओराला, लोग बिटुराला त ढोलकी ठोकाला जुटेले ‘अनारी’ लोग गीत गवनइया में ………. (टेक) अब ना सहात बा, कोइलिया के बोलिया बोले बसवरिया पर भोर के पहरिया त लागे जइसे गोलिया ………. (टेक) सेजिया पर लोटेली काली रे नगीनिया, रोजा करनिनिए में उचटेली निनिया, मारेली ताना, मनमाना, जनाना, आ करेली ठिठोलिया ………. (टेक) सनन्-सनन् सन बहे पुरवइया, दाहा अइसन देह डोले जइसे डोले नइया, अखेड़ेला बाड़ा जब खाड़ा होके देखी कवनो गवने के कनिया ………. (टेक) जुल्मी जवानी के जोम ना अड़ाता, जीही की मरि जाई कुछु ना बुझाता, तुत ‘अनारी’ बेमारी बढ़वल बीतल फागुनो के होलिया ………. (टेक) ...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Homepage
– गीत – फूल खिले लागल, सुख मिले लागल, अब बुझाता बसन्त मधुमास आ गइल कहीं कलि पर अलि बिहार करता, कोइलरियो के दिल में हुलास आ गइल …(टेक) धरती पीयर हो गइली दुल्हनिया नियर, ओस चमकेली चनिया के पनिया नीयर, बगिया में नबाब बनि गइले गुलाब, इ बुझाता धरती पर आकाश आ गइल …(टेक) नाया किसलय निकसले झरल पात जब, रट पपीहा लगवलसि बनत बात तब, रोज मलय पवन मन के पागल करे, घास पातो पर नाया सुबास आ गइल …(टेक) मन ना रोकले रोकाला रसदार भइले, रतिपति चारू ओर पहरेदार भइले, मस्त भइले ‘अनारी’ छठा देखि के, जे फलेवों रहल अनुका पास आ गइल …(टेक)...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Homepage
– गीत – माटी में मिलतावे, बापू के सपनवा, जाता रसातल में आपन वतनवा ………. (टेक) गाँधी बाबा सोचले रामराज हम ले आइबी, सोने चिरइया आपन हीरा के बनाइबी, सत्य अहिंसा के गावसु गानवा ………. (टेक) आधा पेट खाके, अधवे पेन्ही-2 धोती लिहले आजादी बरिआई अपना होती, लोहा मानि गइले अंगरेज दुशुमनवा ………. (टेक) मारि खइले गारी सुनले गइले जेहलखाना, जबरन आजादी के बिनले ताना बाना, जेकरा के पूजा करे संउसे जहानवा ………. (टेक) राम अउरी कृष्ण अवतार जहा लिहले, बुद्ध, गुरूनानक उपदेश जहाँ दिहले, देवता लो धइले जहवां नरतनवा ………. (टेक) जनवो से प्यारी धरती माई हमारी, कलपेली रोजो-2 झंखेले ‘अनारी’ गइले अखड़ेरे जहाँ केतने के जानवा ………. (टेक)...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri, Homepage
– गीत – गीत लिखता नहीं कल के अखबार पर गिरती सरकार पर, सजते दरबार पर, गीत लिखता नहीं ……. गीत का है विषय मेरे पीड़ित मनुज स्वार्थों के लिये जिसको घेरे दनुज लेखनी है अड़ी मुक्ति के द्वार पर गीत लिखता नहीं ……. बन्दगी करते करते कमर झुक गई कर्ज चुकता नहीं जिन्दगी चुक गई फिक्र है आजकल घिरती दीवार पर गीत लिखता नहीं ……. जाति भाषा में जो बाँटते आदमी आज भी ऐसे जन की नहीं है कमी फिरके फिरके में बँटते हुए प्यार पर गीत लिखता नहीं ……. पूर्ण मुक्ति के रण जो खड़े एक क्षण आज उनकी शरण बढ़ रहे हैं चरण अब भरोसा नहीं छलते पतवार पर गीत लिखता नहीं ……. गीत लिखता नहीं कल के अखबार पर गिरती सरकार पर, सजते दरबार पर...