by Nazar | Aug 9, 2015 | Pt. Suresh Sharma
– गीत – चर्चा चारों ओर है फैली राजनीति दुखदायी है जन नायक के बदन से निकली बेशर्मी बेहयायी है चर्चा चारों ओर है फैली —– वातानुकूल कमरे में बैठा नेता मौज उड़ाता है सीमा का प्रहरी सरहद पर शान में जान गँवाता है खून पसीने की उपजाई कृषक की सस्ती कमाई है चर्चा चारों ओर है फैली —– हत्या दंगा चोरी चकैती सबका सृजनहार है हवस में अन्धा गोरख धन्धा पाप का पालनहार है दया धर्म की बातें करता मन मनहूस कसाई है चर्चा चारों ओर है फैली —– अन्न का मेरे दाम लगाता जैसे खेत उसी का है वेतन है हर साल बढ़ाता जैसे देश उसी का है कहता बजट में घाटा आया इसीलिये मँहगाई है चर्चा चारों ओर है फैली —–...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Pt. Suresh Sharma
– गीत – कौतूहल से मुक्त हो जाये धरा संसार की स्वर्ण सी लगने लगे अनुपम धरा संसार की काले गोरे का कलुषमय भेद मिट जाये सभी शक नहीं मिट जायेगी सारी व्यथा संसार की जाति धर्म भेद का उलझा हुआ सवाल है गर सुलझ जाये पहेली लगे धरा सुरधाम सी व्योम की छाया तले जी रहा संसार है मेदनी से प्राण पाया परम्परा पाषाण की शान्ति का अर्क कब ज्योतिर्गमय होगा बन्धुओं आस इकलौती पुरानी है व्यथा संसार की जग आकांक्षी शान्ति का शान्ती सद्भाव की सुरेश जीवन नीर सा गतिबद्ध हो हर जानकी...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Jamaluddin Safar
– गीत – धरती का है स्वर्ग जहाँ, आपस में भाई चारा भारत का दिल जिसको कहते वह है गाँव हमारा भारत का दिल जिसको —– सभी धर्म के लोग जहाँ आपस में मिल के रहते मिट्टी को ही सोना समझें खेतों में मन बहके शादी ब्याह में एक जुटता का चलता जंह भण्डारा भारत का दिल जिसको —– होली का त्योहार हो चाहे ईद मिलन का नाता दीवाली हो चाहे मुहर्रम सुख दुख में सब भ्राता संकट में एक दूजे को देते हैं जहाँ सहारा भारत का दिल जिसको —– साम्प्रदायिक सद्भाव जहाँ है प्रेम का बहता दोना प्रकृति की है छटा निराली विहंसे हर एक कोना गाय भैंस हैं जहाँ विचरते दूध की बहती धारा भारत का दिल जिसको —– अमराई में कोयल कूके खेत में नाचे मोर प्रेम की जलती दीया बाती जहाँ न होता शोर एकजेहती का रूप सफ़र है अम्न आँख का तारा भारत का दिल जिसको —–...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Jamaluddin Safar
– वृक्षारोपण – वृक्षारोपण करो धरा पर सुखमय यह संसार करो जीवन का आधार वृक्ष है प्रदूषण उपचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हर मानव एक वृक्ष लगाये देख के मन आह्लादित हो हरी भरी धरती हो अपनी वनों से यह आच्छादित हो वन्य जीव जनतुओं का अपने कभी नहीं संहार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– दस वृक्षों को अगर लगाएं पाएंगे सब पुण्य सन्तान धरा पे जितने वृक्ष लगेंगे सुख पाये उतना इन्सान प्राण दायिनी वायु वृक्ष है इस पर जरा विचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– पानी की फिर कमी न होगी ऊसर भूमि लहरायेगी शस्य श्यामला बनेगी धरती प्रकृति परी मुस्कायेगी वृक्ष धरा का आभूषण है लगा के सब श्रृंगार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हरे भरे वन वृक्ष न काटो वरना सब पछताओगे सूखा बाढ़ भूकम्प सुनामी लहरों से दुख पाओगे वृक्ष लगा के सफ़र धरा पर जीवन का उद्धार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —–...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Jamaluddin Safar
– कविता – मानव मानव भेद जो करता वह न पाता कभी भी कल है प्रेम अहिन्सा भाई चारा एकजेहती का रूप विमल है देश के हित में सर जो कटाते राष्ट्र प्रेम वह महा प्रबल है प्यासे मन को तृप्ति जो कर दे वह ही उसका गंगाजल है पर दुख से द्रवित जो हृदय करुणा की वह मूर्ति सकल है धैर्य व साहस जिसमें होता उसके हर संकट का हल है कर्तव्य के पथ पर सदा जो चलता वह मानव बढ़ता प्रतिपल है उसी वृक्ष की पूजा होती जो कि देता मीठा फल है घटा जो छा के भू पर बरसे समझो कि वह ही बादल है सदा समय से काम जो करता वह खुश रहता हर एक पल है उसी का जीवन बना सार्थक जिसके बांहों में निज बल है भाग्य सहारे जो भी रहता हर कामों में रहा विफल है दो दिल धड़कन एक जो कर दे सफ़र वो समझो एक गजल है...